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पर्व विशेष · परंपरा और पूजा मार्गदर्शिका

देवउठनी एकादशी

देवउठनी एकादशी विष्णु-उपासना और चातुर्मास के समापन की परंपरा से जुड़ी है। तुलसी-विवाह के आयोजन भी इसी समय होते हैं।

पारंपरिक तिथि / आधार
कार्तिक शुक्ल एकादशी
उपासना और उत्सव
देवउठनी एकादशी और विष्णु-पूजन

देवउठनी एकादशी की तिथि और पूजा-समय

एकादशी व्रत और अगले दिन पारण की अवधि अलग देखें।

पर्व की तिथि, पूजा की अवधि और व्रत के पारण का समय अलग हो सकते हैं। तारीख देखते समय वर्ष, शहर और अपनी पारिवारिक परंपरा साथ में देखें।

स्थानीय पंचांग देखें

नीचे के लिंक संबंधित महीनों का पंचांग खोलते हैं। ये पूजा-मुहूर्त की घोषणा नहीं हैं; इस लेख में वर्ष और शहर के लिए अलग से सत्यापित मुहूर्त प्रकाशित नहीं किया गया है।

देवउठनी एकादशी का महत्व

देवउठनी या प्रबोधिनी एकादशी को भगवान विष्णु के जागरण की धार्मिक परंपरा से जोड़ा जाता है। चातुर्मास के समापन और कई क्षेत्रों में मांगलिक आयोजनों के पुनः आरंभ का यह प्रतीक अवसर है।

एकादशी-व्रत का दिन, तुलसी-विवाह का आयोजन और द्वादशी का पारण अलग निर्णय हैं। इन तीनों को एक ही तारीख और एक ही मुहूर्त में समेटना उचित नहीं है।

पूजा की सामग्री और तैयारी

  • विष्णु का चित्र या परिवार का पूजनीय स्वरूप
  • दीप, पुष्प और नैवेद्य
  • तुलसी-संबंधी परंपरागत सामग्री
  • कथा या विष्णु-स्मरण की पाठ-सामग्री

पूजा और उत्सव का क्रम

विष्णु-पूजन और तुलसी की सेवा की जाती है। व्रत-पारण अपने संप्रदाय की विधि के अनुसार करें।

  1. अपने संप्रदाय का एकादशी-दिन और अगले दिन का पारण देखें।
  2. विष्णु-पूजन की सामग्री सजाएँ और अपने सामर्थ्य के अनुसार व्रत-संकल्प करें।
  3. जागरण-पूजन, कथा, भजन और आरती अपनी पारिवारिक रीति से करें।
  4. पारण मान्य समय पर करें। तुलसी-विवाह की परंपरा हो तो उसका दिन और विधि अलग तय करें।

क्षेत्रीय और पारिवारिक परंपराएँ

तुलसी-विवाह एकादशी या उसके बाद की तिथियों में स्थानीय रीति से होता है। विवाह-मुहूर्त की वापसी भी सभी स्थानों में एक ही नियम नहीं है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या देवउठनी का दिन विवाह के लिए अपने-आप पर्याप्त है?

व्यक्तिगत विवाह-मुहूर्त में अतिरिक्त पंचांग-विचार होते हैं; केवल पर्व का नाम पर्याप्त नहीं है।

पारण क्या है?

व्रत खोलने का नियत समय। एकादशी की समाप्ति और पारण का समय हमेशा एक नहीं होता।

परंपरा-संदर्भ: Drik Panchang पर देवउठनी एकादशी। ऊपर दिया पूजा-परिचय सामान्य मार्गदर्शन है; विशिष्ट अनुष्ठान अपनी परंपरा के अनुसार करें।