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पर्व विशेष · परंपरा और पूजा मार्गदर्शिका

शारदीय नवरात्रि

शारदीय नवरात्रि में देवी की उपासना की जाती है। घटस्थापना, दुर्गा-पाठ, गरबा और कन्या-पूजन जैसी परंपराएँ परिवार और क्षेत्र के अनुसार अलग होती हैं।

पारंपरिक तिथि / आधार
आश्विन शुक्ल प्रतिपदा से नवमी
उपासना और उत्सव
शारदीय देवी उपासना और नवदुर्गा

शारदीय नवरात्रि की तिथि और पूजा-समय

घटस्थापना का समय प्रतिपदा और स्थानीय मुहूर्त से चुना जाता है। तिथि के घटने-बढ़ने से किसी दिन का पूजा-क्रम बदल सकता है।

पर्व की तिथि, पूजा की अवधि और व्रत के पारण का समय अलग हो सकते हैं। तारीख देखते समय वर्ष, शहर और अपनी पारिवारिक परंपरा साथ में देखें।

स्थानीय पंचांग देखें

नीचे के लिंक संबंधित महीनों का पंचांग खोलते हैं। ये पूजा-मुहूर्त की घोषणा नहीं हैं; इस लेख में वर्ष और शहर के लिए अलग से सत्यापित मुहूर्त प्रकाशित नहीं किया गया है।

शारदीय नवरात्रि का महत्व

शारदीय नवरात्रि आश्विन मास में देवी-उपासना का अवसर है। दुर्गा के विविध स्वरूपों का स्मरण, पाठ, आरती और संयम इसके प्रमुख अंग हैं। हर परिवार में व्रत, कलश और कन्या-पूजन की रीति एक जैसी नहीं होती।

प्रतिपदा से नवमी तक तिथियों की अवधि बराबर नहीं रहती। कभी एक तिथि दो सूर्योदयों को मिलती है या दो तिथियाँ एक ही दिन में आती हैं; इसलिए नौ दिनों का साधारण अंग्रेज़ी कैलेंडर ही पर्याप्त नहीं है।

पूजा की सामग्री और तैयारी

  • देवी का चित्र या प्रतिमा
  • दीप, धूप, पुष्प और नैवेद्य
  • कलश-स्थापना की परंपरा हो तो कलश व संबंधित सामग्री
  • पाठ-पुस्तक और स्वच्छ आसन

पूजा और उत्सव का क्रम

घटस्थापना से पहले स्थान और सामग्री तैयार करें। व्रत, पाठ और पूजा का क्रम अपनी पारिवारिक परंपरा और स्वास्थ्य के अनुसार रखें।

  1. व्रत और पूजन का संकल्प अपनी क्षमता व परंपरा के अनुसार तय करें। प्रतिपदा और स्थापना-समय पहले देखें।
  2. यदि घर में घटस्थापना होती है तो परिवार की विधि या आचार्य के निर्देश से स्थापना करें।
  3. प्रतिदिन देवी-स्मरण, पाठ, नैवेद्य और आरती का नियमित समय रखें। अखंड ज्योति हो तो उसकी देखरेख का प्रबंध करें।
  4. अष्टमी/नवमी के कन्या-पूजन, हवन या समापन का दिन स्थानीय तिथि के अनुसार अलग जाँचें।

क्षेत्रीय और पारिवारिक परंपराएँ

गुजरात का गरबा, बंगाल का दुर्गोत्सव और दक्षिण भारत का गोलू इसी ऋतु की अलग अभिव्यक्तियाँ हैं। उनका कार्यक्रम घरेलू नवरात्रि-व्रत से पूरी तरह समान नहीं होता।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या चैत्र और शारदीय नवरात्रि एक पेज से देखनी चाहिए?

दोनों देवी-उपासना हैं, लेकिन मास और पर्व-क्रम अलग हैं। चैत्र नवरात्रि का अलग विवरण देखें।

कन्या-पूजन अष्टमी को करें या नवमी को?

दोनों परंपराएँ मिलती हैं। परिवार की रीति और उस वर्ष की स्थानीय तिथि को साथ देखकर निर्णय लें।

परंपरा-संदर्भ: Drik Panchang पर शारदीय नवरात्रि। ऊपर दिया पूजा-परिचय सामान्य मार्गदर्शन है; विशिष्ट अनुष्ठान अपनी परंपरा के अनुसार करें।